​शिकायत है कि श्री महादेव एंटरप्राइजेज को खनन के लिए जितनी जमीन की स्वीकृति मिली थी, खनन माफिया उससे अधिक क्षेत्र में पोकलेन और भारी मशीनों के जरिए खुदाई कर रहा है। सीमांकन के नियमों को नजरअंदाज कर लीज क्षेत्र से बाहर जाकर किया जा रहा यह खनन सीधे तौर पर राजस्व को चूना लगाने और प्राकृतिक संसाधनों की डकैती का बड़ा मामला बनता नजर आ रहा है।
​प्रदूषण और केंद्रीय भूजल प्राधिकरण के नियमों का उल्लंघन
​खनन स्थल पर धूल और प्रदूषण नियंत्रण के लिए तय किए गए मानकों की घोर अनदेखी की जा रही है। पानी के छिड़काव और ग्रीन बेल्ट जैसे नियमों को कागजों तक सीमित कर दिया गया है, जिससे आसपास के ग्रामीणों और पर्यावरण पर गंभीर संकट मंडरा रहा है।
​इसके अलावा, केंद्रीय भूजल प्राधिकरण के दिशा-निर्देशों की खुलेआम अनदेखी की जा रही है। खदान में बिना मानक अनुपालन के गहराई तक खुदाई किए जाने से क्षेत्र के जलस्तर पर विपरीत असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।

​इस पूरे प्रकरण में संबंधित विभागों की कार्यप्रणाली भी संदेह के घेरे में आ गई है। सवाल उठ रहे हैं कि जब खनन में इतने बड़े पैमाने पर अनियमितताएं बरती जा रही हैं, तो संबंधित विभागों से अनापत्ति प्रमाण पत्र कैसे और किन परिस्थितियों में जारी किया गया? स्थानीय ग्रामीणों और समाजसेवियों ने एनओसी की निष्पक्ष जांच और फर्जीवाड़े की आशंका जाहिर करते हुए उच्चस्तरीय जांच की मांग की है।

​मुख्य बिंदु

​सीमा से बाहर खनन

लीज एरिया से अधिक जमीन पर अवैध उत्खनन।

​पर्यावरण को नुकसान

प्रदूषण नियमों और धूल नियंत्रण उपायों की अनदेखी।

​जल संकट का खतरा

केंद्रीय भूजल प्राधिकरण के तय मानकों का उल्लंघन।

​विभागीय भूमिका संदिग्ध

एनओसी की प्रक्रिया और वैधता पर गहराया संशय।

​स्थानीय निवासियों ने शासन-प्रशासन से मांग की है कि तत्काल मामले का संज्ञान लेकर खदान का सीमांकन कराया जाए, एनओसी फाइलों की जांच हो और दोषियों के खिलाफ कठोर दंडात्मक कार्रवाई की जाए।

By RUDRA NARAYAN

स्वतंत्र पत्रकार एवं लेखक। सोनभद्र, पूर्वांचल और क्षेत्रीय विकास, जनसमस्याओं व प्रशासनिक मुद्दों पर निरंतर निष्पक्ष व सटीक रिपोर्टिंग।

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