ब्यूरो सोनभद्र
बीजपुर/सोनभद्र।एनटीपीसी रिहंद परियोजना से निकलने वाली राखड़ लदी गाड़ियों के संचालन को लेकर ग्रामीणों की समस्याएं कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। कुछ दिन पहले पोथीपाथर में राखड़ वाहन का टायर फटने से उछली गिट्टी की चपेट में आकर बच्चों समेत कुछ लोगों के चोटिल होने के बाद ग्रामीणों ने बीजपुर-बखरिहवा मार्ग पर चक्काजाम किया था। उस दौरान जनप्रतिनिधियों, पुलिस और संबंधित अधिकारियों की मौजूदगी में वार्ता के बाद कई बिंदुओं पर सहमति बनी थी। लेकिन ग्रामीणों का आरोप है कि अब तक इन नियमों का प्रभावी तरीके से पालन नहीं किया जा रहा है।
ग्रामीणों के अनुसार, चक्काजाम समाप्त कराने के दौरान राखड़ वाहनों की गति सीमा 25 किलोमीटर प्रति घंटा निर्धारित करने, सड़क पर नियमित रूप से पानी का छिड़काव कराने और निर्धारित समय में वाहनों का संचालन बंद रखने पर सहमति बनी थी। तय किया गया था कि सुबह 7:30 बजे से 9:30 बजे तक राखड़ वाहन नहीं चलेंगे। शाम के समय भी निर्धारित अवधि में वाहनों के संचालन पर रोक लगाने की बात कही गई थी।

हालांकि, ग्रामीणों का कहना है कि समझौते के बावजूद राखड़ वाहनों का आवागमन जारी है और धूल की समस्या से लोगों को राहत नहीं मिल रही है। सड़क पर उड़ती राख और वाहनों से गिरने वाली गिट्टी के कारण राहगीरों, बच्चों और आसपास रहने वाले लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि नियमों का पालन सुनिश्चित कराने के लिए जिम्मेदार स्तर पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं दिखाई दे रही है।
ग्रामीणों का कहना है कि चक्काजाम के दौरान अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों की मौजूदगी में समस्याओं के समाधान का भरोसा दिया गया था। इसके बावजूद यदि सहमति के बिंदुओं को जमीन पर लागू नहीं किया जाता है, तो ऐसे आश्वासनों का क्या औचित्य रह जाता है? लोगों ने मांग की है कि राखड़ वाहनों की गति सीमा, पानी के छिड़काव और निर्धारित समय में संचालन बंद रखने के नियमों का सख्ती से पालन कराया जाए।
ग्रामीणों ने दी दोबारा चक्काजाम की चेतावनी
ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि समय रहते नियमों का पालन सुनिश्चित नहीं कराया गया और धूल व राखड़ से होने वाली परेशानी पर रोक नहीं लगी, तो वे आने वाले दिनों में दोबारा चक्काजाम करने को मजबूर होंगे। ग्रामीणों ने संबंधित अधिकारियों से मामले को गंभीरता से लेते हुए तत्काल कार्रवाई करने की मांग की है।
अब सवाल यह है कि चक्काजाम के बाद बनी सहमति का पालन सुनिश्चित कराने के लिए संबंधित विभाग और एनटीपीसी प्रबंधन क्या कदम उठाते हैं, ताकि ग्रामीणों को धूल, राख और दुर्घटनाओं के खतरे से राहत मिल सके।
