​विशेष संवाददाता / सोनभद्र
​उत्तर प्रदेश की ‘ऊर्जा राजधानी’ के रूप में पहचाना जाने वाला सोनभद्र जिला इन दिनों कुदरत के अनियंत्रित दोहन और माफियाराज की गिरफ्त में है। जिले के बालू घाटों और स्टोन माइंस (बोल्डर खदानों) में पर्यावरणीय नियमों को ताक पर रखकर ऐसा अवैध कारोबार चल रहा है, जो न सिर्फ स्थानीय पारिस्थितिकी तंत्र को तबाह कर रहा है, बल्कि क्षेत्र के भविष्य के लिए भी एक गंभीर संकट पैदा कर रहा है। खनिज संपदा की इस खुली लूट ने प्रशासनिक सुस्ती और मिलीभगत पर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

​सरकारी नियमावली के अनुसार, नदी के तल से बालू निकालने के लिए निर्धारित और पर्यावरण-अनुकूल तरीकों के अलावा केवल सीमित साधनों का उपयोग किया जाना चाहिए। लेकिन सोनभद्र में इन सभी प्रावधानों को कागजी पन्नों तक ही सीमित कर दिया गया है।

बालू साइडों पर नियमों को ठेंगा दिखाते हुए नदी के बहाव के बीचों-बीच से बालू का अवैध उठान किया जा रहा है, जिससे नदी का प्राकृतिक मार्ग बदल रहा है।

पर्यावरण और जलीय जीवन की सुरक्षा के प्रावधानों को ताक पर रखकर घाटों पर जेसीबी (JCB) और अन्य भारी-भरकम मशीनों का बेधड़क इस्तेमाल हो रहा है।

इस बेलगाम खनन से न केवल नदी का प्राकृतिक प्रवाह बाधित हो रहा है, बल्कि जलीय जीव-जंतुओं का जीवन भी पूरी तरह संकट में पड़ गया है।
​बोल्डर खदानों में एनजीटी (NGT) के नियमों की सरेआम धज्जियां
​पत्थर और बोल्डर खदानों की स्थिति इससे भी अधिक भयावह है। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) और खनन विभाग के कड़े दिशा-निर्देशों के बावजूद, सोनभद्र के पहाड़ी अंचलों में नियमों की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं।

पत्थरों को तोड़ने के लिए प्रतिबंधित एवं अत्यधिक शक्तिशाली विस्फोटकों का धड़ल्ले से इस्तेमाल किया जा रहा है। इस अंधाधुंध ब्लास्टिंग से आसपास के गांवों की धरती कांप उठती है, रिहायशी मकानों में बड़ी-बड़ी दरारें आ रही हैं और स्थानीय ग्रामीण भय के साए में जीने को मजबूर हैं।

खनन क्षेत्रों में उन भारी-भरकम मशीनों और तरीकों का प्रयोग किया जा रहा है, जिन पर कानूनन पूर्ण प्रतिबंध है।

​मानक विहीन गहरी खुदाई:

तय गहराई के नियमों को ताक पर रखकर निर्धारित सीमा से कहीं अधिक गहराई तक अवैध खनन किया जा रहा है, जिससे कभी भी कोई बड़ा जानलेवा हादसा हो सकता है।

​सोनभद्र में फल-फूल रहा यह अवैध कारोबार सिर्फ पर्यावरण को दी जा रही क्षति नहीं है, बल्कि यह इस क्षेत्र के सुरक्षित भविष्य के साथ एक खुला खिलवाड़ है। यदि समय रहते जिम्मेदार विभागों और जिला प्रशासन ने इस पर सख्त शिकंजा नहीं कसा, तो खनन माफिया प्रकृति के इस अमूल्य खजाने को पूरी तरह नेस्तनाबूद कर देंगे।
​अब यह देखना बेहद दिलचस्प और जरूरी होगा कि इस सनसनीखेज खुलासे के बाद शासन-प्रशासन की नींद खुलती है या फिर यह अवैध कारोबार यूं ही प्रशासनिक संरक्षण में बदस्तूर जारी रहता है।

By RUDRA NARAYAN

स्वतंत्र पत्रकार एवं लेखक। सोनभद्र, पूर्वांचल और क्षेत्रीय विकास, जनसमस्याओं व प्रशासनिक मुद्दों पर निरंतर निष्पक्ष व सटीक रिपोर्टिंग।

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