लगातार शिकायतों के बावजूद नगर पंचायत ओबरा द्वारा अवैध डंपिंग और रात्रि में खुलेआम आग लगाने का खेल जारी; जवाबदेही से भागते अधिशासी अधिकारी ने शिकायतकर्ता का नंबर किया ब्लॉक।
ओबरा (सोनभद्र)।
ओबरा नगर पंचायत क्षेत्र अंतर्गत सेक्टर-9, ओम चौराहा एक बार फिर गंभीर पर्यावरणीय संकट का केंद्र बन चुका है। स्वच्छ भारत मिशन और नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) के सख्त निर्देशों को ताक पर रखकर यहां खुले में न सिर्फ बड़े पैमाने पर नगर का कचरा डंप किया जा रहा है, बल्कि रात के अंधेरे में सुनियोजित तरीके से आग के हवाले किया जा रहा है।
ताजा मामला 22 अक्टूबर की रात का है, जहां अंधेरा होते ही डंपिंग स्थल पर आग की भीषण लपटें और जहरीला धुआं देखा गया। स्थानीय नागरिकों द्वारा लिए गए जियो-टैग वीडियो फुटेज से साफ जाहिर होता है कि दिन में किए गए अवैध कचरा निस्तारण के सबूत मिटाने के लिए यह आग लगाई जा रही है।
जवाबदेही से भागे अधिकारी, नंबर किया ब्लॉक:
सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि इस पूरे मामले की जानकारी नगर पंचायत प्रशासन और अधिशासी अधिकारी (EO) को भली-भांति है। स्थानीय स्तर पर जब नागरिकों और जागरूक लोगों ने इस गंभीर लापरवाही और अवैध डंपिंग को लेकर संपर्क करने की कोशिश की, तो समाधान निकालने के बजाय अधिशासी अधिकारी (EO) ने अपनी जवाबदेही से पल्ला झाड़ते हुए शिकायतकर्ताओं का नंबर ही ब्लॉक कर दिया। एक जिम्मेदार पद पर बैठे प्रशासनिक अधिकारी का ऐसा तानाशाही और गैर-जिम्मेदाराना रवैया सीधे तौर पर सवालों के घेरे में है।
नियमों की खुली अवहेलना:
ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम, 2016 (Solid Waste Management Rules, 2016) और NGT के स्पष्ट आदेशों के तहत खुले में कचरा जलाना दंडनीय अपराध है। इसके बावजूद नगर पंचायत प्रशासन की नाक के नीचे यह अवैध गतिविधि बेखौफ जारी है।
गोवंश और जनस्वास्थ्य पर गहरा आघात:
डंपिंग स्थल पर भारी मात्रा में प्लास्टिक और खतरनाक अपशिष्ट बिखरे पड़े हैं, जिन्हें लाचार आवारा गोवंश खाने को मजबूर हैं। वहीं, रात भर जलने वाले प्लास्टिक और रासायनिक कचरे से उठने वाला जहरीला धुआं पूरे सेक्टर-9 और आसपास के रिहायशी इलाकों में सांस के मरीजों, बुजुर्गों और बच्चों के स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा बन चुका है।

प्रशासनिक स्तर पर शिकायत दर्ज:
सजग नागरिकों द्वारा इस मामले में उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (UPPCB) और NGT को मय साक्ष्य (Geo-tagged प्रमाण) औपचारिक ईमेल भेजकर तत्काल संज्ञान लेने और ओबरा नगर पंचायत पर भारी पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति (Environmental Compensation) अधिरोपित करने की मांग की गई है। अब देखना यह होगा कि जनहित की अनदेखी करने और नंबर ब्लॉक कर जिम्मेदारी से भागने वाले अधिकारियों पर जिला प्रशासन व संबंधित विभाग क्या ठोस कार्रवाई करता है।
